Palamu’s Palash in India’s Best Innovative Projects

पलामू की पलाश राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति पा रही है. पलामू की पहचान पलाश से रही है. यहीं पर एशिया फेम कुंदरी का लाह बगान है, जो 421 एकड़ में फैला हुआ है. इसे पुनर्जीवित करते हुए पलाश के फूल से गुलाल बनाने की प्रक्रिया पलामू उपायुक्त अमीत कुमार की पहल पर शुरू हुई. पर्यावरण की रक्षा करते हुए उससे रोजगार सृजन करने का जो प्रयोग किया गया. 




इस प्रयोग की न सिर्फ राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक चर्चा हुई है. पलामू अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर नकारात्मक कारणों को लेकर चर्चा में रहा है. कभी गरीबी, कभी भुखमरी, अकाल व उग्रवाद के कारण पलामू की चर्चा हुई थी. लेकिन इस बार दिल्ली में 12वें सिविल सर्विसेज-डे के उदघाटन के मौके पर देश भर के इनोवेटिव प्रोजेक्ट की जो चर्चा हुई, उसमें पलामू भी शामिल है. 

दिल्ली में 12 वें सिविल सर्विसेज डे के अवसर पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यू पाथवे पुस्तक का विमोचन किया है. इस पुस्तक में पेज नंबर 28 व 29 में पलामू में पलाश के फूल को लेकर जो कार्य हुआ है, उसकी चर्चा की गयी है. पलामू रेडी टू प्ले गुलाल शीर्षक से पूरे कहानी की चर्चा की गयी है. इस किताब में देश भर में बेहतर इनोवेटिव प्रोजेक्ट को जगह दी गयी है, जिसमें पलामू को भी जगह मिली है.




मालूम हो कि पलामू में पलाश के फूल से हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है. उसका क्रय सरकारी स्तर पर हो रहा है और उससे गुलाल बनाया जा रहा है. इससे जहां रोजगार का सृजन हो रहा है, वहीं ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी आ रही है. क्योंकि लोगों को अब यह लगने लगा है कि पेड़ की रक्षा करने से ही उनलोगों को रोजगार मिलेगा. उपायुक्त अमीत कुमार के सक्रिय पहल के कारण यह कार्य संभव हो सका है. इस वजह से अब कुंदरी लाह बगान में भी फिर से पुराने दिन लौटने की उम्मीद है.

श्रोत : प्रभात खबर

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