Mudma Jatra Mela on 6-7 October 2017

इस वर्ष मुड़मा जतरा मेला छह और सात अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा | मुड़मा स्थित पड़हा कार्यालय में राजी पड़हा जतरा समिति की बैठक में मुड़मा जतरा के सफल आयोजन को लेकर चर्चा की गयी | साथ ही संचालन समिति का गठन भी किया गया |

मेले में सभी पड़हा अपनी पहचान झंडे के साथ उपस्थित होते हैं | मुड़मा मेले के साथ ही राँची जिले में मेले का क्रम चल पड़ता है और यह पूस-माघ तक चलता है | यह कई पड़हा पंचायतों का सम्मिलित मेला है | इसकी व्यवस्था पहले जमींदार देखते थे अब इसके लिए मेला समिति बन गयी है और वही इसकी देख-रेख, सुरक्षा आदि के इंतजाम करती है | वर्षों से धर्मगुरु बंधन तिग्गा जी की अध्यक्षता में यह समिति मुड़मा जतरा मेला का सफल आयोजन करती आ रही है | 

इतिहास :

राँची के मांडर प्रखंड में लगने वाला यह मेला आश्विन पूर्णिमा की रात से शुरू होता है | दो दिवसीय इस मेले के बारे में एक दन्त कथा प्रचलित है | कभी इसी स्थल पर मुंडाओं और उराँवों के बीच सात दिन-रात नृत्य-संगीत का द्वंद्व हुआ था | शर्त के अनुसार हारने वाले इस क्षेत्र को छोड़कर दक्षिण (खूँटी) की ओर चले जायेंगे |

इस द्वंद्व में मुंडाओं की हार हुई और उनकी इस हार का कारण मुंडाओं के अखरा में मांदर का नहीं होना बना | इसकी आवाज की गूंज की मधुरता के सामने नगाड़े आदि पीछे रह गए | मुड़मा पर ही उराँव और मुंडा जनजाति का मिलन हुआ था | यहीं दोनों के बीच सामजिक और सांस्कृतिक समझौता हुआ |

सबसे बड़ी न्यायलय :

ऐसी मान्यता है की पुराने समय में जब लोगों को कहीं से न्याय नहीं मिलता था तो वे अपनी समस्याओं के निपटारे के लिए यहीं पर पहुँचते थे | यहाँ जो भी फैसला आता था उसे वे तन-मन से स्वीकार करते थे | मुड़मा जतरा को उराँवों और मुंडा जनजाति का सुप्रीम कोर्ट भी कह सकते हैं |

 

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