Lako Bodra – creator of the Warang Chiti writing system

By | September 25, 2018

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के हो अनुभाग की ओर से 24 सितंबर 2018 को वारंग क्षिति हो भाषा की लिपि के जनक लको बोदरा की 99वीं जयंती मनाई गयी | इस अवसर पर कमाल लोचन कोडा की दो पुस्तकों का लोकरपन भी किया गया | जिसमे हो लोक कथा और लड़ाका हो शामिल हैं |

कौन हैं लको बोदरा ?

इनका जन्म 19 सितंबर 1919 को पश्चिमी सिंघभूम के खूंटपनी मे हुआ था | जालंधर सिटी कॉलेज से स्नातक की | इसके बाद होमियोपैथिक चिकित्सा की डिग्री प्राप्त की | वे गीत-संगीत और बांसुरी बजाने में निपुण थे | उन्होने हो भाषा की लिपि वारंग क्षिति का निर्माण किया | उन्होने शिशु हलं, कोल रूल, ब्ह बुरु वोगा बुरु, हो हयम पहम पुथी , पोम्पो, रघुवंश, एला ओल एतो उटा , षड़ा-षड़ा संगेन , षार होरा हो, हो बाकणा, हो अंग्रेजी हिंदी डिक्शनरी पुस्तकें लिखीं हैं |

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