Jamuna Tudu to get Women Transforming India Awards 2017

By | August 29, 2017

पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया की लेडी टार्जन जमुना टुडू के नाम एक और सम्मान जुड़ जाएगा। 29 अगस्त 2017 को नई दिल्ली स्थित नीति आयोग के दफ्तर में जमुना को Women Transforming India Awards 2017 से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान पूरे भारत की छह महिलाओं को मिलेगा हैं।

क्षेत्र में जमुना टुडू की पहचान जंगल बचाने से है। उन्होंने महिला होते हुए भी विपरीत परिस्थितियों से जूझते हुए अपने गांव से जंगल बचाने की शुरुआत की। राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक जमुना को सम्मानित कर चुके हैं। इस बार नीति आयोग सम्मानित करेगा।

जमुना ने बताया कि इस सम्मान के लिए देश की 300 महिलाओं ने आवेदन दिया था। जिसमें जमुना समेत 6 महिलाओं का चयन हुआ है। जमुना के अलवा सफीना हुसैन, अरुणिमा सिन्हा, सुभाषिनी मिस्त्री, कमल कुम्हार और लक्ष्मी अग्रवाल भी सम्मानित की जाएंगी।



क्या है जमुना टुडू की कहानी :

  • इन्होंने जंगल की अवैध कटाई पर अपने बल-बूते पर रोक लगाई। जब किसी भी पुरुष ने उनका साथ नहीं दिया तो इन्होंने 4 महिलाओं के साथ जंगलों में पेट्रोलिंग शुरू की।
  • वे जंगल माफिया से भिड़ जाती हैं। ये कई बार लहूलुहान होकर घर लौटीं। पिछले साल इन्हें राष्ट्रपति ने सम्मानित भी किया है। 
  • आज जमुना के गांव में बेटी पैदा होने पर 18 ‘साल’ वृक्षों का रोपण किया जाता है। बेटी के ब्याह के वक्त 10 ‘साल’ वृक्ष परिवार को दिए जाते हैं। रक्षाबंधन पर सारा गांव वृक्षों को राखी बांधता है।
  • जमुना ने स्कूल व नलकूप के लिए अपनी जमीन भी दान में दे दी। 2013 में जमुना को “फिलिप्स ब्रेवरी अवाॅर्ड’ से सम्मानित किया गया था।
  • दिल्ली की एक टीम उन पर डॉक्युमेंट्री बना चुकी है। 2014 में उनको स्त्री शक्ति अवाॅर्ड दिया गया। 2016 में उनको राष्ट्रपति द्वारा भारत की प्रथम 100 महिलाओं में चुना गया और राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया गया।




इस मुहिम की शादी के बाद की शुरुआत :

  • इस मुुहिम की शुरुआत सन् 2000 के आसपास हुई, जब जमुना की शादी चाकुलिया मतुरखम गांव में हुई। जमुना ने देखा कि आस-पास का इलाका वन सम्पदा से भरपूर था, लेकिन लगातार कटाई जारी है।
  • जमुना ने लोगों से कहा कि सबको मिलकर जंगलों को कटने से रोकना होगा। गांव के किसी भी पुरुष ने उनका साथ देने से इंकार कर दिया, लेकिन औरतें आगे आईं।
  • सन् 2004 में केवल 4 महिलाओं के साथ मिलकर जमुना ने जंगलों में पेट्रोलिंग का काम शुरू किया। धीरे-धीरे ये संख्या बढ़कर 60 तक जा पहुंची। उन्होंने ‘महिला वन रक्षक समिति’ का गठन किया।
  • ये समिति वनों को कटने से बचाने के साथ नए पौधे लगाकर वनों को सघन बनने में भी योगदान देने लगीं। धीरे-धीरे पुरुषों ने भी जमुना का साथ देना शुरू कर दिया।
  • अवैध कटाई करने वालों से मुकाबले में कई बार जान पर बन आई, लेकिन आज जमुना के गांव में हर कोई जंगलों को बचाने में लगा है।

साभार :- दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान।

 

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