झारखंड के केंद फल के फायदे

इन दिनों स्वाद में अनूठे और पौष्टिकता से भरपूर जंगली मीठा फल ‘केंद’ बाजार में खूब बिक रहा है। आमतौर पर इसे केंद या केंदु फल कहा जाता है। तेंदु, तिरिल, केंदा, तिड़ैल, तेला नाम से भी यह प्रसिद्ध है। इस जंगली फल को आदिवासी तोड़कर अपनी टोकरियों में भरते हैं और स्थानीय बाजार और पास के शहरों में लेकर अाते हैं। गर्मी शुरू होते ही जंगल में यह पकने लगता है। अप्रैल से जून तक यह मिलता है। इन फलों की बिक्री से गरीब आदिवासियों को जहां कुछ रुपयों की अतिरिक्त कमाई हो जाती है, वहीं शहरी लोगों को भी जंगलों के इन फलों का देसी स्वाद मिल जाता है। केंद को जंगल का मेवा कहा जाता है, इसे सूखा कर भी लोग खाते हैं। 

गर्मी की बीमारियां होंगी दूर 

केंद गर्मी का फल है और इस मौसम में खाने से गर्मी की कई बीमारियां दूर होती हैं। लू लगने से भी यह बचाता है। शहरों के ऐसी-कूलर और फ्रीज लोगों को ठंडक नहीं दे पाते हैं, वहीं जंगली इलाकों के फल लोगों को खूब राहत दिलाते हैं। 





विटामिन ‘ए’, ‘बी’ के साथ ‘सी’ भी भरपूर 

डायटीशियन डॉ. मनीषा घई ने बताया कि गर्मी का यह फल अमृत तुल्य है। इसमें कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में मौजूद है, जिससे कमजोर लोग इसे खाकर अपनी सेहत बना सकते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन-ए, विटामिन-बी और विटामिन-सी के अतिरिक्त घुलनशील फाइबर भी उपस्थित रहते हैंं। पेट के लिए अच्छा होने के साथ इतनी विटामिन की मौजूदगी से यह स्किन को भी सेहतमंद बनाते हंै। 

वातनाशक होने से शरीर का दर्द करता है कम 

आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. कमलेश प्रसाद ने बताया कि केंद देश के कई भागों में मिलता है, लेकिन प्रचुर रूप से यह झारखंड में ही पाया जाता है। यह फल मीठा थोड़ा कसैला लिए होता है। इसका फल वीर्यवर्धक, बलवर्धक, पुष्टिकारक होने के साथ तृष्णा को मिटाने वाला है। पेट के कीड़ों को भी कम करता है। इसमें खूब फाइबर होता है, जिससे कब्ज दूर होता है। इसके लगातार सेवन से पुराना कब्ज भी समाप्त हो जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्किन को सुंदर बनाने के साथ बुढ़ापा को भी दूर रखता है। एसिडिटी मेंं भी यह फायदेमंद है। इसमें पोटेशियम पाया जाता है, जो हार्ट के लिए फायदेमंद है। वातनाशक होने के कारण शरीर के हर तरह के दर्द को भी दूर करता है।

श्रोत : दैनिक भास्कर |

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