जील जोम उत्सव

कोल्हान के आदिवासी बहुल इलाकों में इन दिनों जील जोम उत्सव का दौर चल रहा है। पांच साल में एक बार होने वाले इस उत्सव को अलग-अलग गांव में अलग-अलग वर्ष मनाया जाता है। पांच वर्ष का चक्र पूरा होने पर इस पर्व पर संताल आदिवासी घरों में सभी रिश्तेदारों को न्योता दिया जाता है।

क्या है जील जोम :

संताल समाज का मानना है कि रोजी-रोजगार के लिए लोग अपना गाँव-घर छोड़ अन्य प्रदेश में चले जाते हैं | परिवार व समाज के लोगों के बीच संपर्क टूट जाता है | यह दूरी समाज के अस्तित्व के लिए खतरा न बने इसलिए बुजुर्गों ने जील जोम उत्सव की व्यवस्था बनायीं है |

जील जोम अथवा जाहेर डंगरी को आधुनिक भाषा में आदिवासी समुदाय का पारंपरिक पिकनिक भी कहा जा सकता है, क्योंकि इस अवसर पर पूरे गांव के लोग अपने मेहमानों को लेकर एक साथ जाहेरथान के बाहर भोज करते हैं। जाहेरथान के बाहर मेले सा नजारा दिखता है। 

जील जोम उत्सव में संताल समुदाय के लोग अपने पैतृक गाँव रिश्तेदार व सगे सम्बन्धियों से मिलने जरुर आते हैं | जील जोम उत्सव कोई पर्व नहीं है मिलन उत्सव है | उत्सव में सामूहिक खान-पान, नाच-गान के साथ लोग अपने-अपने रोजी रोजगार की तलाश में निकल जाते हैं |

Facebook Comments

You may also like...

error: Content is protected !!